संस्कृति

1 जुलाई को सजेगा डांडा देवराणा जातर का भव्य मेला, 65 गांवों के आराध्य रुद्रेश्वर महादेव के दर्शन को उमड़ेंगे हजारों श्रद्धालु

Vivek Bisht · 29 जून 2026, 03:07 PM · 93 व्यूज़

1 जुलाई को सजेगा डांडा देवराणा जातर का भव्य मेला, 65 गांवों के आराध्य रुद्रेश्वर महादेव के दर्शन को उमड़ेंगे हजारों श्रद्धालु

उत्तरकाशी | पहाड़ की आवाज़ न्यूज़

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के रवांई-जौनपुर क्षेत्र (नौगांव-पुरोला) में 1 जुलाई 2026 को 65 गांवों के आराध्य देव श्री रुद्रेश्वर महादेव की पावन डांडा देवराणा जातर (डांडा का मेला) का भव्य आयोजन होगा। यह मेला उत्तराखंड की सबसे प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में से एक माना जाता है, जिसमें हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आस्था के साथ शामिल होते हैं।

आषाढ़ माह में आयोजित होने वाला यह पौराणिक मेला रवांई घाटी की लोक संस्कृति, देव परंपरा और सामूहिक आस्था का अद्भुत संगम है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान रुद्रेश्वर महादेव अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र भ्रमण पर निकलते हैं। इसी कारण यह जातर पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

65 गांवों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व

डांडा देवराणा जातर में रवांई-जौनपुर क्षेत्र के 65 गांवों से हजारों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपने आराध्य देव के दर्शन कर परिवार, क्षेत्र और समाज की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं।

ढोल-दमाऊं की गूंज पर झूमेगा पूरा डांडा देवराणा

मेले का सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिलता है, जब ढोल-दमाऊं, रणसिंघा और नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु हारुल, रासौं और तांदी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत करते हैं। देवडोली के स्वागत के साथ पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण और लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर हो जाता है।

उत्तराखंड की लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक

डांडा देवराणा जातर केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह मेला नई पीढ़ी को अपनी देव संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनते हैं और उत्तराखंड की अनूठी लोकसंस्कृति को करीब से देखने का अवसर प्राप्त करते हैं।

शेयर करें:
उत्तरकाशी के दिरयाणा मंदिर में भगवान श्री सिद्धेश्वर महादेव की आषाढ़ी जात्रा और ऐतिहासिक दिरयाणा मेले में दर्शन करते श्रद्धालु।
संस्कृति

सम्पन्न हुई दशगी हातड़ क्षेत्र के आराध्य भगवान श्री सिद्धेश्वर महादेव की पौराणिक आषाढ़ी जात्रा एवं ऐतिहासिक दिरयाणा मेला

उत्तरकाशी के दशगी हातड़ क्षेत्र में भगवान श्री सिद्धेश्वर महादेव की पौराणिक आषाढ़ी जात्रा एवं ऐतिहासिक दिरयाणा मेला श्रद्धा और परं...

01 जुल. 2026 · 128 व्यूज़
गढ़वाल की पारंपरिक रामलीला: सात दिन का मंचन, 200 से अधिक कलाकार
संस्कृति

गढ़वाल की पारंपरिक रामलीला: सात दिन का मंचन, 200 से अधिक कलाकार

पौड़ी — गढ़वाल क्षेत्र की पारंपरिक रामलीला का इस साल भव्य मंचन किया जा रहा है, जिसमें 200 से अधिक कलाकार भाग ले रहे हैं।

05 मई 2026 · 1,675 व्यूज़