उत्तराखंड में 5 साल में बंद हुए 826 सरकारी प्राथमिक स्कूल, शून्य छात्र नामांकन बना सबसे बड़ा कारण
उत्तराखंड में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में राज्य के 826 सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन विद्यालयों में एक भी छात्र नामांकित नहीं था, जिसके चलते इन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक टिहरी गढ़वाल में सबसे अधिक 262 विद्यालय, पौड़ी गढ़वाल में 120, पिथौरागढ़ में 104 और अल्मोड़ा में 83 सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए। उत्तरकाशी सहित अन्य पर्वतीय जिलों में भी छात्र संख्या लगातार घटने और पलायन के कारण कई विद्यालय प्रभावित हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन, घटती जन्मदर और सरकारी विद्यालयों में कम होता नामांकन इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं। कई दूरस्थ गांवों में परिवारों के पलायन के बाद स्कूलों में छात्र नहीं बचे, जिससे विद्यालयों का संचालन संभव नहीं रहा।
इसी बीच नीति आयोग की रिपोर्ट में भी देशभर में कम नामांकन वाले सरकारी विद्यालयों के एकीकरण (School Consolidation) की नीति का उल्लेख किया गया है। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को आसपास के स्कूलों में विलय कर संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग करने की बात कही गई है।
हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यालयों के बंद होने से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है।
पिछले 5 वर्षों में उत्तराखंड में 826 सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद।
मुख्य कारण शून्य छात्र नामांकन।
टिहरी गढ़वाल में सबसे अधिक 262 स्कूल बंद।
पलायन और घटता नामांकन बड़ी चुनौती।
कई स्थानों पर विद्यालयों का विलय (Merger) भी किया गया।
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